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Self-destructive...Wish was born in the 70s.

Wednesday, December 21, 2011

मैं सुबह की पहली चाय बेचता हूँ!

रात की अधूरी करवटें ताज़ी सुबह से समेटता हूँ,
कल जो कडवाहट बटोरी थी दिन भर...
उसे अद्रकी धुंए से धो कर खुरंचता हूँ|


रात से भाग कर, जब दिन अंगडाई लेता है,
और अलसाई नज़रों से मसल कर देखता है सुबह के इशारे को...
मैं सफ़ेद दूध में उस दिन को सुबह का सुराग बेचता हूँ|


मैं सुबह की पहली चाय बेचता हूँ|

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